मैट्रो इन दिनों “सैराट” जैसी फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए बॉलीवुड फिर से प्यार, मोहब्बत और इमोशन से भरी एक और फिल्म लेकर आया है, जिसका नाम है “परम सुंदरी”। इसे बनाया है अपने क्रिएटिव कंटेंट के लिए पहचाने जाने वाले मैडॉक फिल्म्स के द्वारा।
बहुत से क्रिटिक्स और दर्शक एक्स पर अपने रुझान लिख रहे हैं, जिनके मुताबिक इसकी कहानी शाहरुख खान की “चेन्नई एक्सप्रेस” और “रब ने बना दी जोड़ी” जैसी है। तो क्या सचमुच ऐसा है या नहीं आइए जानते हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर की यह फिल्म कैसी है, इस आर्टिकल के माध्यम से।
कहानी
तुषार जलोटा के निर्देशन में बनी “परम सुंदरी”, जिन्होंने अपने निर्देशन की शुरुआत “दसवीं” फिल्म से की थी, यहां कहानी में एक डेटिंग ऐप के बारे में दिखाया गया है, जिसके जरिए आप अपने सच्चे प्यार को आसानी से ढूंढ सकते हैं। इसकी टेस्टिंग करने के लिए दिल्ली का परम, केरल की सुंदरी के पास हजारों किलोमीटर का फासला तय करके पहुंच जाता है। यहां टिपिकल बॉलीवुड फिल्मों की तरह सुंदरी को पटाना इतना आसान काम नहीं है।

खैर, दर्शक शुरू से ही जान जाते हैं कि दोनों में प्यार हो ही जाएगा। म्यूजिक, प्यार और इमोशन के साथ यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। वैसे कहानी में बहुत कुछ खास तो नहीं है, पर फिर भी यह फील-गुड करवा सकती है, अगर आप अभी किसी के प्यार में पड़े हुए हैं। अब क्या यह डेटिंग ऐप सही है या फिर प्यार होने के बाद इन दोनों में तनाव पैदा होना शुरू हो जाता है इन्हीं सब बातों को जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी।
पॉजिटिव और नेगेटिव पॉइंट्स
“परम सुंदरी” फिल्म देखने के बाद मुझे ऐसा लगा कि सिद्धार्थ ने शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की “चेन्नई एक्सप्रेस” फिल्म कई बार देखी है, क्योंकि उनकी एक्टिंग शाहरुख खान से काफी मिलती-जुलती लग रही थी। शुरुआत में एक मीठी सी खुशबू देती यह फिल्म दर्शकों के चेहरे पर खुशी लाने का काम करती है।
जाह्नवी कपूर बहुत प्यारी लगी हैं, जिनसे नजरें नहीं हटतीं, पर कहीं-कहीं वह भूल जाती हैं कि वे केरल की हैं और अच्छी हिंदी बोलने लगती हैं, जो थोड़ा हास्यास्पद सा लगता है। 2 घंटे 16 मिनट की यह फिल्म अच्छा टाइमपास करवा सकती है। जिन दर्शकों को नेचर से प्यार है, उनके लिए यहां बहुत कुछ है, जैसे नदी, पहाड़, झरने और फील-गुड करवाने वाली वाइब।

बढ़िया सिनेमैटोग्राफी के साथ सोनू निगम का गाना “परदेसिया” बार-बार आकर दर्शकों का मूड बनाने का काम करता है। पहला हाफ जहां तेजी से निकल जाता है, वहीं इंटरवल के बाद की कहानी को आसानी से प्रेडिक्ट किया जा सकता है।
जिस तरह से कॉमेडी के साथ इस तरह के कॉन्सेप्ट को पेश किया गया है, वह शानदार है, पर अगर इमोशन को थोड़ा और मिक्स किया जाता, तो फिल्म और भी अच्छी बन सकती थी। यह मेरी व्यक्तिगत राय है। कहानी में वह असर नहीं है, जिससे इसे बार-बार देखा जा सके। इसे बस एक बार पॉपकॉर्न के साथ देख सकते हैं।
क्या खास है “परम सुंदरी” में?
“परम सुंदरी” का पहला हिस्सा, जैसा कि ऊपर बताया गया है, शानदार है, पर इसका दूसरा हिस्सा बॉलीवुड की कई फिल्मों की याद दिलाता है, जिससे एक बात तो साफ है कि बॉलीवुड में अच्छे राइटर्स से सही काम नहीं लिया जा रहा है। दूसरा हिस्सा लंबा है और अंत का क्लाइमेक्स प्रेडिक्टेबल है। इसे देखकर बिल्कुल भी नहीं लगता कि यह मैडॉक की फिल्म है।
केरल का कल्चर और वहां के लोग, रहन-सहन देखकर मजा आता है। सिद्धार्थ मल्होत्रा पूरी फिल्म में जबरदस्ती का कूल दिखने के लिए एक जैसा लुक देते रहे हैं और वे कूल लगे भी हैं। सोनू निगम का गाना और केरल की शानदार सिनेमैटोग्राफी की वजह से यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। एडल्ट या वल्गर सीन तो नहीं हैं, पर अंत में एक किस सीन जरूर है। मेरी तरफ से इसे दिए जाते हैं 5 स्टार में से 3 स्टार की रेटिंग।
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