LOKAH Chapter 1 review:लोकाह – चैप्टर 1: मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में पहले भी थरंगम जैसी फिल्म बनाने वाले टैलेंटेड निर्देशक डोमिनिक अरुण अपनी एक और फिल्म लेकर हाज़िर है नाम हैलोकाह – चैप्टर 1:कल्याणी प्रियदर्शन और नासलेन मेन किरदारों में हैं, फिल्म का जॉनर केरल की लोककथाओं और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों से गुजरती हुई सुपरहीरो कहानी से जुड़ती है। पहले भी इस जॉनर की फिल्मे मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से आचुकी ही जैसे की मिन्नल मुरली ,लिटिल सुपरमैन जैसी फिल्मे
कहानी
कहानी की बात की जाए तो हमारा हीरो फिल्म के अंदर मेडिकल की पढ़ाई का रहा है। घर से दूर होने की वजह से वह एक हॉस्टल में किराए पर रह रहा होता है। टिपिकल बॉलीवुड फिल्मो के जैसे हीरो के ठीक हॉस्टल के सामने बने घर में एक लड़की रहती है (कल्याणी प्रियदर्शन) जिसे देखते ही पहली नज़र में हीरो को प्यार हो जाता है यहाँ से कहानी (कल्याणी प्रियदर्शन) के इर्द गिर्द ही घूमती नज़र आती है। दूसरी ओर फिल्म में ऑर्गन चोरी की घटनाये भी शुरू हो चुकी है।

ऑर्गन चोरी ग्रुप पहले लोगो को किडनैप करता है बाद में उनके बॉडी पार्ट निकल लेते है। एक दिन हीरोइन की किडनैपिंग करने के लिए कुछ गुंडे इसके पीछे लगे हुए है तब हीरो इसे बचाने के लिए इनका पीछा करता है पर तब उसे कुछ ऐसा देखने को मिलता है जो इसके होश उड़ा देता है। ये देखता है के (कल्याणी प्रियदर्शन) एक सुपर वोमेंट है जो अकेली ही इन गुंडों पर भारी पड़ रही है। अब क्या (कल्याणी प्रियदर्शन) आम इंसान है या फिर किसी दूसरे ग्रह की वासी आखिर इसे यह सुपर पावर कैसे मिली वह इस पावर के इस्तेमाल से क्या करने वाली है यही सब आगे फिल्म में देखने को मिलेगा।

पॉज़िटिव एंड निगेटिव पॉइंट
फिल्म का कॉन्सेप्ट निर्देशक को हॉलीवुड फिल्मो को देख कर आया होगा जिस तरह से मार्वल और डीसी की फिल्मो में सुपर पावर को दिखाया जाता है ठीक वैसा ही कुछ एक्सपेरिमेंट यहाँ भी किया गया है। सिनेमा एक ऐसी चीज़ है जहा दर्शक जनता है के परदे पर जो हम देख रहे है वह असल दुनिय में होना संभव नहीं है पर फिर भी उसे सबकुछ रियल जैसा आभास होता है कहानी में रयल्टी बनाने के लिए उसे जितना लॉजिकल बनाया जाए उतना कम है खैर सुपर पावर वाली फिल्मो में लॉजिक ढूढ़ना थोड़ा मुश्किल होता है

पर फिर भी कुछ ऐसी फिल्मे पहले बनाई जा चुकी है जो रियल्टी के बहुत करीब लगती है जैसे की बासिल जोसफ की 2021 में आयी फिल्म मिन्नल मुरली ऋतिक रोशन फिल्म कोई मिल गया। पर अगर बात की जाए लोकाह – चैप्टर 1 की तो इस फिल्म का लॉजिक से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। फिल्म देखते समय यह अहसास होता है के मेकर ने अगर थोड़ी क्रेटिवटी यहाँ और डाली होती है तब यह फिल्म और निखर के दर्शको के सामने आती।
(कल्याणी प्रियदर्शन) का किरदार समझ से परे है कौन है ये क्या है ये कहा से आयी है इसके पास जो पावर है आखिर वो कहा से आये है किसने दिए है यह सब बाते कन्फ्यूज करने वाली है (कल्याणी प्रियदर्शन) सुपर वुमन है जिसे किसी भी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है क्युकी इसके पास पावर ही कुछ ऐसी है पर इतनी पावर होने के बाद भी आखिर क्यों से खून पिने की ज़ोरुरत पड़ती है। यहाँ कुछ बड़े स्टार कैमियो को भी लिया गया है

जिसमे आते है बासिल जोसफ, सोबिन शाहिर, टोविनो थॉमस, और दुलकर सलमान पर इन कैमियों से भी कहानी पर कुछ ख़ास असर देखने को नहीं मिला कहानी जैसी चल रही थी वैसी ही चलती रही। बॉलीवुड फिल्मो में रोमांस और तमिल फिल्मो के एक्शन से हम ऊब गए थे तभी दर्शक मलयालम सिनेमा की ओर जाना पसंद करता था क्युकी इनकी फिल्मो में वो क्रेटिव कहानी पेश की जाती थी जो की और फिल्म इंडस्ट्री में देखने को नहीं मिलती थी पर इस बार मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से सिर्फ और सिर्फ निराशा ही हासिल हुई।
निष्कर्ष
फिल्म का प्रोडक्शन वर्क कैमरा सीजीआई वीएफएक्स एडिटिंग सब कुछ अच्छा है साथ ही सभी कैरेक्टरों ने अच्छा काम भी किया है अगर आपको बिना लॉजिक के अपने दिमाग को रिलेक्स देते हुए फिल्मे देखना पसंद है तो यह फिल्म आपके लिए बिलकुल परफेक्ट फिल्म है। मेरी तरफ से इसे दिए जाते है पांच में से तीन स्टार की रेटिंग।
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