सेंसर बोर्ड
फिल्म को सबसे पहले सेंसर बोर्ड में दिखाया जाता है। पहले हैकर्स उच्च तकनीक का इस्तेमाल करके सेंसर बोर्ड से फिल्में चुरा लिया करते थे। लेकिन अब सेंसर बोर्ड से कोई भी फिल्म लीक नहीं हो सकती, क्योंकि हमारे सेंसर बोर्ड ने अपनी प्राइवेसी और सिक्योरिटी को पहले से कई गुना हाईटेक कर लिया है। जैसा कि हम जानते हैं, भारत में टैलेंट की कमी नहीं है। हमारे इंजीनियर दूसरे देशों में जाकर सेफ्टी और सिक्योरिटी प्रदान करते हैं। अब यह कहना कि फिल्म सेंसर बोर्ड से लीक हुई है, पूरी तरह से गलत माना जाएगा।
पायरेसी
शुक्रवार को किसी फिल्म का पहला शो शुरू होते ही उस फिल्म की पायरेसी इंटरनेट पर उपलब्ध करा दी जाती है। यह हम सभी को पता है कि ऐसी फिल्में किन-किन वेबसाइट्स पर उपलब्ध होती हैं। कुछ गिनी-चुनी वेबसाइट्स हैं जो इन पायरेटेड फिल्मों को अपनी साइट पर अपलोड करती हैं। हजारों बार इन यूआरएल को बैन किया जा चुका है, लेकिन फिर भी ये वेबसाइट्स सब-डोमेन बनाकर नई वेबसाइट तैयार कर लेती हैं। इस तरह की वेबसाइट्स को रोकने के लिए बहुत ज्यादा लोगों की जरूरत नहीं है। यदि 5 से 10 लोग रोजाना मॉनिटरिंग करें और जैसे ही कोई सब-डोमेन बनाया जाए, उसे ब्लॉक करने का काम करें, तो इसे आसानी से रोका जा सकता है। अब सिनेमाघरों में कैमरा ले जाकर फिल्म रिकॉर्ड करना बहुत आसान हो गया है। इसे हम नहीं रोक सकते। हमें रोकना है तो उन अवैध वेबसाइट्स को, जिन पर ये फिल्में अपलोड की जा रही हैं।
सिक्योरिटी प्राइवेसी में कमी
मेकर्स द्वारा बनाई गई फिल्म को जिस डेटाबेस में रखा जाता है, वह डेटाबेस (सर्वर) पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता। अगर यह सुरक्षित होता, तो फिल्में इतनी आसानी से इंटरनेट पर लीक नहीं होतीं। करोड़ों रुपये में बनने वाली फिल्म सिनेमाघरों में चल रही होती है, और उसी समय इंटरनेट पर लीक कर दी जाती है। इसका प्रभाव इसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर साफ देखने को मिलता है। हॉलीवुड या अन्य देशों की फिल्में, जैसे कोरियन या जापानी फिल्में, इंटरनेट पर आसानी से लीक नहीं होतीं, क्योंकि इन देशों में अवैध वेबसाइट्स को सख्ती से ब्लॉक किया जाता है। भारत में भी ऐसी सख्ती की जरूरत है।
हमारी खुद की कमी
कई अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी कंपनियां, जैसे कुछ जानी-मानी सट्टेबाजी वेबसाइट्स, मूल फिल्म को लीक करके उसे अपने विज्ञापनों के साथ ऑनलाइन अपलोड करती हैं। लोग इन्हें बड़े मजे से देखते हैं। इन फिल्मों के माध्यम से ये अवैध कंपनियां अपना प्रमोशन करती हैं। भारत में लाखों लोग ऐसी स्कैम सट्टेबाजी कंपनियों के जाल में फंसे हुए हैं। ये कंपनियां बड़ी रकम देकर किसी भी फिल्म के मूल प्रिंट को खरीद सकती हैं। सोचिए?
ऑनलाइन सट्टेबाजी कंपनियों का शामिल होना
फिल्मों को लीक करके उन्हें किसी वेबसाइट पर अपलोड करके पैसे कमाने से कहीं ज्यादा, इन फिल्मों में अपने विज्ञापन डालकर कंपनियां अपनी मार्केटिंग करती हैं। इससे उन्हें बड़ा फायदा होता है। भारत में ऐसी कई कंपनियां पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं, लेकिन ये सट्टेबाजी कंपनियां भारतीय युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए पायरेटेड फिल्मों का सहारा लेती हैं। इससे उन्हें काफी फायदा भी मिलता है। भले ही हमें और आपको ऐसा न लगे, लेकिन इन विज्ञापनों को देखकर कई लोग इन ऐप्स पर जाते हैं, अपना अकाउंट बनाते हैं, और फिर सट्टेबाजी के जरिए अमीर बनने के सपने देखते हैं।
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