बॉलीवुड की दुनिया में लखनऊ हमेशा से एक खास जगह रखता है, ये नवाबों का शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों, गंगा-जमुनी तहजीब और हसीन लोकेशन्स के लिए हमेशा से ही फिल्ममेकर्स की पहली पसंद रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पिछले दो दशकों में लखनऊ में 20 से ज्यादा बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हुई है,
जो शहर की अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट दे रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक स्टडी के मुताबिक इन फिल्मों ने पर्यटन को 15% बढ़ावा दिया है। आज हम बात करेंगे ऐसी 4 फिल्मों की जिन्होंने लखनऊ को अपनी कहानी का हिस्सा बनाया।
गदर: एक प्रेम कथा
2001 में रिलीज हुई अनिल शर्मा की ‘गदर: एक प्रेम कथा’ बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार है। सनी देओल और अमीषा पटेल स्टारर इस फिल्म के कई महत्वपूर्ण सीन लखनऊ के आसपास शूट किए गए थे, खासकर शहर के पुराने इलाकों में।

फिल्म के कुछ हिस्से लखनऊ रेलवे स्टेशन और आसपास के गांवों में फिल्माए गए थे जो विभाजन की परेशानियों को दर्शाते हैं, ये लोकेशन्स फिल्म की इमोशनल डेप्थ को बढ़ाती हैं। हाल ही में फिल्म की 24वीं सालगिरह पर डायरेक्टर ने बताया कि लखनऊ की मिट्टी ने गदर: एक प्रेम कथा की कहानी को असली रंग दिया।
जॉली एलएलबी
अरशद वारसी और बोमन ईरानी की 2013 की हिट फिल्म ‘जॉली एलएलबी’ पूरी तरह लखनऊ में शूट हुई थी। विकिपीडिया और की रिपोर्ट्स बताती हैं कि लखनऊ की सिविल कोर्ट और हजरतगंज जैसे इलाकों को फिल्म में प्रमुखता से दिखाया गया, जो भारतीय न्याय व्यवस्था पर आधारित है।

डायरेक्टर सुभाष कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा कि शहर की असली कोर्टरूम्स ने फिल्म को रियलिस्टिक टच दिया है। ये फिल्म न सिर्फ एंटरटेनमेंट देती है बल्कि लखनऊ की कानूनी विरासत को हाइलाइट करती है।
तनु वेड्स मनु रिटर्न्स
2015 की कंगना रनौत और आर.माधवन स्टारर ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ ने लखनऊ को अपनी कहानी का आधार बनाया था। फिल्म के कई सीन लखनऊ यूनिवर्सिटी और शहर के पार्कों में शूट किए गए थे, जो शादी और रिलेशनशिप्स की कहानी को और भी ज़्यादा मजेदार बनाते हैं।

डायरेक्टर आनंद एल.राय ने बताया कि लखनऊ की लोकल कल्चर ने स्क्रिप्ट को नई जान दी है। ये फिल्म सुपरहिट रही और लखनऊ को टूरिस्ट्स के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया।
रेड
अजय देवगन की 2018 की फिल्म ‘रेड’ लखनऊ में हुई एक असली इनकम टैक्स रेड पर आधारित है। फिल्म की शूटिंग लखनऊ के गोमती नगर और पुराने बाजारों में हुई थी, जो कहानी को ऑथेंटिक बनाती है।

डायरेक्टर राज कुमार गुप्ता ने कहा कि शहर की भीड़भाड़ वाली गलियां फिल्म के सस्पेंस को बढ़ाती हैं। ये फिल्म न सिर्फ मनोरंजक है, बल्कि लखनऊ की आधुनिक चुनौतियों को भी छूती है।
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