बॉलीवुड की तरफ से आज 14 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में एक नई फिल्म रिलीज की गई है, जिसका नाम ‘बंदा सिंह चौधरी’ है। फिल्म का जॉनर एक्शन-ड्रामा कैटेगरी में आता है। बात करें मूवी की लेंथ की, तो यह दो घंटे 10 मिनट की है।
फिल्म का डायरेक्शन ‘अभिषेक सक्सेना’ ने किया है, जिन्होंने इससे पहले साल 2017 में आई फिल्म ‘फूल्लू’ का डायरेक्शन किया था। बात करें बंदा सिंह चौधरी फिल्म की स्टोरी की, तो यह साल 1999 के दशक की है, जिसमें भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध के बाद की स्टोरी को दिखाया गया है।
कहानी
फिल्म की स्टोरी 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद की स्थिति पर आधारित है, जिसे पंजाब के एक गांव में दिखाया गया है, जहां पर ‘बंदा सिंह चौधरी’ (अरशद वारसी) नाम का किरदार है, जो एक किसान का बेटा है और पेशे से खेती-बाड़ी करता है। उसे ‘लल्ली’ (मेहर विज) से प्यार है और वह उसके इर्द-गिर्द चक्कर लगाता है।
बंदा सिंह प्यार में इतना डूब जाता है कि इन दोनों की शादी हो जाती है। उन्हें ईश्वर के वरदान के रूप में एक बच्ची भी प्राप्त होती है। इस परिवार की जिंदगी तब बदल जाती है, जब 1999 के युद्ध के बाद देश में ऐसी स्थिति बन जाती है, जिससे पंजाब में कुछ लोग हिंदू पंजाब छोड़ो आंदोलन शुरू कर देते हैं।
जिसके कारण कई परिवार तबाह हो जाते हैं। इन्हीं में एक परिवार बंदा सिंह का भी होता है, जिसे उसके गांव के पंचायत द्वारा यह आदेश दिया जाता है कि वह भी गांव छोड़कर चला जाए, क्योंकि वह हिंदू है। इसे मानने से इनकार करके बंदा सिंह अपने गांव से बगावत की शुरुआत करता है।
फैमिली की रक्षा और दायित्व इस फिल्म में बखूबी दिखाया गया है, जो कि हमें एक अहम सीख भी देता है। पूरी स्टोरी जानने के लिए आपको देखनी पड़ेगी यह फिल्म, जो कि आपके नजदीकी सिनेमाघरों में उपलब्ध है।
टेक्निकल एस्पेक्ट
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है, जिसमें इसके सभी एक्शन सीक्वेंस को बेहतर तरीके से फिल्माया गया है। बात करें मूवी के बैकग्राउंड म्यूजिक की, तो यह भी बढ़िया है, जिसमें खूब सारे गाने नजर आते हैं। जिनमें से कुछ कारगर हैं, तो कुछ बोर भी करते हैं।
खामियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसका कैरेक्टर डेवलपमेंट है, जिस पर मेकर्स ने बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया है, जिसके कारण मूवी में किसी भी किरदार से अटैचमेंट फील नहीं होता। फिल्म की दूसरी सबसे बड़ी कमी इसका स्टोरी डेवलपमेंट है, जिसमें फिल्म की पटकथा काफी कमजोर है।
फाइनल वर्डिक्ट
अगर आप अरशद वारसी के डाई हार्ट फैन हैं, तो आप इस फिल्म को बिल्कुल भी मिस न करें, जिसमें आप अरशद को एक अलग तरह के रोल में देख सकेंगे। क्योंकि अमूमन वे कॉमेडी रोल्स में ज्यादा नजर आते हैं। फिल्म में लव स्टोरी का एंगल भी डाला गया है, जो कि बिल्कुल भी कारगर साबित नहीं होता, जिसे दिखाने की कोई जरूरत नहीं थी।
हमारी तरफ से इस फिल्म को दिए जाते हैं 2.5/5 ⭐।
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