Maa Jaye review hindi “मां जाए” (Maa Jaye) एक पंजाबी ड्रामा फिल्म है जिसमें जिम्मी शेरगिल, रहमत रतन, मानव विज और योगराज सिंह जैसे कई पंजाबी अभिनेता देखने को मिलते हैं। जिस तरह से इस फिल्म ने दर्शकों को कंटेंट देने का वादा किया था, क्या यह अपने उस वादे पर खरी उतरती है? इन्हीं सब बातों पर चर्चा करेंगे अपने इस लेख के माध्यम से।
फिल्म की कहानी
इसकी कहानी पूरी तरह से दो भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती है। वे दो भाई हैं जिम्मी शेरगिल और मानव विज। कहानी में मानव विज की दोनों टांगें ठीक तरह से काम नहीं करतीं, उनकी दोनों टांगें खराब हो चुकी हैं। मानव विज का एकमात्र सहारा उनका छोटा भाई जिम्मी शेरगिल है। यही वजह है कि इसका नाम “मां जाए” रखा गया है। “मां जाए” का अगर हिंदी में मतलब समझें तो होता है “मां चली गई” या “मां चली जाए”। बेसिक सी कहानी को यहाँ बेसिक नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक बहुत बड़ा रूप दिया गया है।
A story that travels through time, across borders, and straight into the heart. 🌍❤️#MaaJaye releasing at PVR INOX on Aug 29!
— P V R C i n e m a s (@_PVRCinemas) August 28, 2025
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इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 1947 में पंजाब के पंजाबियों ने क्या खोया था। इसके बाद 1984 के दंगों के बीच भी पंजाब ने बहुत कुछ खोया था। इसके बाद 2001 में भी कुछ इसी तरह की घटना हुई थी, जो पंजाबियों के लिए एक बुरे दौर जैसी थी। शायद आपको याद होगा 9/11/2001, वो अमेरिका के इतिहास का काला दिन था, जब आतंकवादियों द्वारा यूएस में प्लेन क्रैश किया गया था। इस प्लेन क्रैश में बहुत से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। उस समय ऐसा था कि जो भी दूसरे देश के लोग यूएस में काम कर रहे थे, उन्हें भी वहाँ के लोगों द्वारा शक की नजरों से देखा जाने लगा था। सभी को पता है कि पंजाबी कम्युनिटी यूएस में रहती है। इस आतंकवादी हमले की वजह से उन्हें भी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इस फिल्म का दूसरा हिस्सा पूरा का पूरा इसी कहानी को दिखाता है। पहले हिस्से में दो भाइयों का प्यार और इन दोनों भाइयों के बीच शुरू हुई तकरार दिखाई गई है। यह कहानी पानी की धारा की तरह बहती जाती है, जो दर्शकों को कोमलता का अहसास दिलाती है। जब हमें ऐसा लगने लगता है कि पूरी कहानी ऐसे ही आगे बढ़ती जाएगी, तभी एक ट्विस्ट पूरी कहानी को एक नया रूप दे देता है।

पॉजिटिव पॉइंट
फिल्म के सितारों में जिम्मी शेरगिल हो या मानव विज, योगराज सिंह ने भी यहाँ शानदार प्रदर्शन दिया है। निर्देशक नवनीत सिंह ने कहानी के माध्यम से जो कहना चाहते थे, वह उन्होंने बखूबी कहा है। उन्होंने कहानी को इस तरह से पेश किया है कि वह अपनी बात समझा भी सकें और दर्शक बोर भी न हों।
एक-दो सीन को अगर छोड़ दिया जाए, तो यह फिल्म बोर बिल्कुल भी नहीं करती है। यहाँ बहुत सी ऐसी चीजों के बारे में भी जानकारी दी गई है, जो शायद हम तक खुलकर सामने नहीं आई थीं। यह एक वास्तविक घटना पर आधारित फिल्म है। तब यूएस में पंजाबी अपने हक के लिए किस तरह से लड़े थे, यही सब फिल्म के माध्यम से हमें दिखाया गया है।

निगेटिव पॉइंट
अगर इस कहानी को दो भाइयों की कहानी के रूप में देखा जाए कि किस तरह से दो भाई मिलते हैं, फिर बिछड़ते हैं, तो यह फिल्म उन दर्शकों को ज्यादा पसंद आएगी, जिन्हें “अरदास” जैसी फिल्में पसंद आई थीं, क्योंकि यह एक भावनात्मक फिल्म है। जिन्हें इमोशनल फिल्में पसंद नहीं, शायद इसकी कहानी उनके दिल को न छू पाए।
कुछ क्रिटिक्स का यह भी मानना है कि कहानी कुछ नया पेश नहीं करती है। विभाजन के समय को बहुत सी फिल्मों में पहले भी दिखाया जा चुका है। कहानी काफी हद तक प्रेडिक्टेबल है। दूसरा हिस्सा धीमा फील होता है। फिल्म की थीम भावनात्मकता से भरी है, तो यह शायद कम पंजाबी दर्शकों को पसंद आए, क्योंकि पंजाब में ज्यादातर हंसी-मजाक से भरपूर एक्शन फिल्में ही पसंद की जाती हैं।
निष्कर्ष
अगर आप बड़े भाई हैं या छोटे भाई हैं, तो यह फिल्म आपको जरूर महसूस करवाएगी कि आज के दौर में बड़े भाई और छोटे भाई का मिलकर रहना कितना जरूरी है। यहाँ सिर्फ परिवार के महत्व को ही नहीं समझाया गया है, बल्कि यह भी बताया गया है कि अगर आप किसी दूसरे देश जाते हैं, तो वहाँ आपके देश के लोग मिलते हैं, तो उन्हें भी अपने परिवार की तरह ही देखना चाहिए। इसका सिनेमाटोग्राफी, कलर ग्रेडिंग, स्क्रीनप्ले शानदार है। मेरी तरफ से इसे दी जाती है पांच में से 3.5 स्टार की रेटिंग।
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