भारत के शहरों की तुलना अगर गांवों से करें तो गांवों में आज भी कई पुरानी रीति-रिवाज़ और परंपराएं मानी जाती हैं, चाहे वह गांव भारत के दक्षिण में हो या उत्तर में। कुछ ऐसी ही कहानी को दर्शाती एक तेलुगु फिल्म पारधा 22 अगस्त 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई है। फिलहाल इसे हिंदी डबिंग में रिलीज़ नहीं किया गया है। आइए जानते हैं कि इस फिल्म में क्या खास है और यह दर्शकों को क्या दिखाना चाहती है।
कहानी
दो घंटे पच्चीस मिनट के रनटाइम वाली पारधा की कहानी एक ऐसे पडाथी गांव की है, जहां रूढ़िवादी पद्धति हद से ज़्यादा है। गांव की औरतों को आज के समय में भी हर वक्त घूंघट में रहना पड़ता है। इस गांव की कुलदेवी है ज्वालम्मा, और गांव के लोगों का मानना है कि अगर किसी ने यहां की औरतों का चेहरा देख लिया, तो उन्हें ज्वालम्मा देवी का श्राप लगता है। गांव की ही एक लड़की है, जिसका नाम है
भालक्ष्मी (सुब्बू), जिसे अनुपमा परमेश्वरन ने निभाया है। वह घूंघट के सभी नियमों और निर्देशों का सख्ती से पालन करती है। कहानी तब नया मोड़ लेती है, जब भालक्ष्मी (सुब्बू) का घूंघट हवा के झोंके से हट जाता है। अब देवी के श्राप से बचने और गांव को बचाने के लिए भालक्ष्मी (सुब्बू) क्या-क्या करती है गांव के लोग मानते हैं कि अब उसकी ज़िंदगी खतरे में पड़ गई है। तभी सुब्बू अपनी चाची और दोस्त के साथ धर्मशाला की ओर जाती है। इस ट्रिप से उसकी ज़िंदगी कैसे बदलती है, यही इस रोमांचक कहानी का आधार है।
पॉजिटिव और निगेटिव पॉइंट
यह ज़मीनी कहानी हज़ारों गांवों की परंपराओं को दर्शाती है। जो लोग शहरों या मेट्रो सिटी में जन्मे हैं, उन्हें शायद इसका अंदाज़ा न हो, लेकिन यह सब वास्तव में गांवों में आज भी होता है। जो लोग गांवों से ताल्लुक रखते हैं, वे इस फिल्म में दिखाए गए रीति-रिवाज़ों को जल्दी समझ लेंगे, क्योंकि शायद उन्होंने कभी न कभी ऐसा देखा होगा।
कहानी को इस तरह से पेश किया गया है कि कई सीन यूनिक और वास्तविक लगते हैं। हालांकि, कहीं-कहीं ऐसा लगता है कि कहानी अपनी स्टोरी से भटकती है, क्योंकि पहले हिस्से की तुलना में दूसरा हिस्सा काफी शानदार है। पहला हिस्सा तेज़ी से चलता है, तो दूसरा हिस्सा थोड़ा धीमा है। एक अच्छा क्लाइमेक्स ही इस फिल्म की यूएसपी है, जिसने पूरी फिल्म को बचाने का काम किया है।
निष्कर्ष
इस फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया गया है, जो हमने पहले न देखा हो। अगर लॉजिक लगाएंगे, तो फिल्म नहीं देख पाएंगे, क्योंकि इसमें कई ऐसी बातें हैं जो अलॉजिकल हैं। वैसे तो यह फिल्म पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती है। मेरी तरफ से इसे दी जाती है 5 में से 3 स्टार की रेटिंग।
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