Sadabahar jaya bachchan movie review in hindi:ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘वेव्स’ पर 1 दिसंबर 2024 को “जया बच्चन की पहली ओटीटी डेब्यू फिल्म ‘सदाबहार’ को फाइनली रिलीज कर दिया गया है”। जिसके मुख्य किरदार में खुद ‘जया बच्चन’ नजर आती हैं।
फिल्म की लंबाई तकरीबन 1 घंटा 32 मिनट की है, तो वहीं इसका जॉनर ड्रामा कैटेगरी के अंतर्गत आता है। मूवी का डायरेक्शन ‘गजेंद्र अहिर’ ने किया है, साथ ही पटकथा को लिखा भी है। इससे पहले जया बच्चन 2023 में आई फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी में नज़र आई थी, जिसके 2 साल बाद अब फिर से वह स्क्रीन पर लौटी हैं। कैसा है जया जी का कमबैक आइए जानते हैं हमारे इस आर्टिकल में।

PIC CREDIT IMDB
कहानी-
इसकी कहानी जया बच्चन से ही शुरू होती है और उन पर ही खत्म। फिल्म में जया जी ने एडवोकेट ‘जगदीश कोठारी’ की वाइफ का रोल निभाया है, हालांकि जगदीश अब इस दुनिया से जा चुके हैं, और अब वह घर की नौकरानी ‘संजना’ के साथ अकेली ही रहती हैं, साथ ही इनका एक बेटा ‘यश’ भी है पर वह अमेरिका में होने के कारण इनसे दूर रहता है। फिल्म में जया बच्चन के नाम को तो नहीं दर्शाया गया लेकिन सभी लोग उन्हें अम्मा कह कर बुलाते हैं।
सब कुछ अपनी रोजमर्रा की रफ्तार से चल रहा था तभी उनके घर का रेडियो खराब हो जाता है और मानो उनकी जिंदगी की गाड़ी थम सी जाती है। जिसे ठीक करवाने के लिए अम्मा एक पुराने पते पर जाती हैं, जहां पर उनके पति एडवोकेट जगदीश ने 12 साल पहले या रेडियो ठीक करवाया था।
पर हालात कुछ यूं बनते हैं कि उस रेडियो मैकेनिक की मौत हो जाती है और वह दुकान हमेशा के लिए बंद हो जाती है। अब अम्मा अपने उस रेडियो को कैसे ढूंढेगी जिसे वे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यारा है। इसी सब्जेक्ट को ले कर फिल्म की कहानी बुनी गई है। साथ ही फिल्म हमें काफी खूबसूरती से यह बताने की कोशिश भी करती है की पुरानी चीज भले ही खराब हो जाए पर उनकी अहमियत कभी खत्म नहीं होती और ना ही उन्हें रिप्लेस किया जा सकता है।
फिल्म के नेगेटिव पॉइंट-
फिल्म सदाबहार एक ‘आर्ट’ मूवी है जो हर तरह की ऑडियंस के लिए नहीं बनी। कहानी में बहुत ही कम किरदारों को पेश किया गया है, जिसके कारण देखने में यह आपको बोरिंग भी लग सकती है। मूवी में किसी भी प्रकार का एक्शन या फिर लव स्टोरी देखने को नहीं मिलती जिसके कारण यंग ऑडियंस इस फिल्म से दूर ही रहेगी।
पॉजिटिव प्वाइंट-
मूवी में जिस तरह से जया बच्चन ने एक्टिंग की है वह काबिले तारीफ है, कहानी में वह हर एस्पेक्ट से परफेक्ट नज़र आई हैं। फिर चाहे वह उनका गुस्सा हो या फिर अम्मा की क्यूटनेस सभी चीजें लाजवाब हैं। यह फिल्म यंग ऑडियंस को जिस तरह का मैसेज देना चाह रही थी वह काफी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष-
फिल्म में हमें यह संदेश देने की कोशिश की गई है, कि बच्चे बड़े हो जाने पर कैसे अपने मां-बाप की चीजों को वैल्यू नहीं देते। क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके मां बाप की तरह ही उनकी चीजें भी बूढी हो गई हैं।
अगर आप इस वीकेंड अपनी मम्मी या फिर अपने परिवार के साथ फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं तो जया बच्चन की सदाबहार को आप रिकमेंड कर सकते हैं। जो आपकी मां के लिए एक ऐसे तोहफे के रूप में होगी जिसे वे कभी भुला ना सकेंगी।
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